RRTC कॉरिडोर के लिए (गुरुग्राम) मानेसर पहाड़ी के अंडरग्राउंड बनेगी सुरंग, 5 स्टेशन होंगे भूमिगत


आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) के दिल्ली सराय काले खां से शाहजहांपुर-निमराना-बहरोड़ तक 106 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर को लेकर वन विभाग की एनओसी लेने की प्रक्रिया चल रही है। जिसके तहत इस कॉरिडोर के मानेसर इलाके में अरावली पहाड़ी के नीचे से विकसित किया जाएगा। इसे लेकर वन विभाग ने एनओसी देने के लिए सर्वे पूरा कर लिया है।

इस कॉरिडोर के तहत अरावली की विलायती बबूल के लगभग 300 पेड़ काटे जाएंगे, इसलिए प्रत्यारोपण का कोई झंझट नहीं है। हालांकि यह प्रक्रिया पिछले चार साल से चल रही है। इस कॉरिडोर के बनने से औद्योगिक क्षेत्र के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। इस योजना के पहले चरण में दिल्ली के सराय काले खां से गुड़गांव होते हुए राजस्थान में एसएनबी (शाहजहांपुर-निमराना-बहरोड़) तक कॉरिडोर विकसित किया जाना है। फिलहाल निर्माण से पहले की गतिविधियां चल रही हैं।


IMT चौक से सहरावन तक 2.5 KM होगी भूमिगत

ट्रेनों के चलने से अरावली पहाड़ी क्षेत्र के वन्य जीव प्रभावित ना हों, इसके लिए मानेसर इलाके में कॉरिडोर आइएमटी चौक से लेकर सहरावन तक लगभग ढाई किलोमीटर अंडरग्राउंड विकसित किया जाएगा। इसे लेकर वन विभाग ने हर स्तर पर सर्वे कर लिया है।

सुरंग बनाकर कॉरिडोर विकसित किए जाने से वन्य जीव प्रभावित नहीं होंगे और पेड़ भी काटने से बचाए जा जा सकेंगे। गांव मानेसर से लेकर गांव सहरावन इलाके की अरावली पहाड़ी क्षेत्र में काफी संख्या में वन्य जीव रहते हैं। इसे देखते हुए आरआरटीएस कॉरिडोर योजना बनाने में वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर का ध्यान रखा गया है।


पांच स्टेशन भी होंगे भूमिगत 106 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर पर कुल 16 स्टेशनों में से पांच स्टेशन अंडरग्राउंड बनाए जाने हैं, दिल्ली, गुड़गांव व मानेसर में काफी लंबा कॉरिडोर अंडरग्राउंड बनाया जाना है। जबकि 11 स्टेशन एलिवेटेड होंगे।

आरआरटीएस विकसित होने के बाद दिल्ली से अलवर तक एक समान विकास दिखाई देगा। दिल्ली में काम करने वाले लोग अलवर तक रहने में संकोच नहीं करेंगे। प्रथम चरण का ही कार्य पूरा होने से दिल्ली-एनसीआर के ऊपर से ट्रैफिक का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा।


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